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अंतरजाल, एक दूसरे से जुड़े संगणकों का एक विशाल विश्व-व्यापी नेटवर्क या जाल है। इसमे कई संगठनो, विश्वविद्यालयो, आदि के सरकारी और निजी संगणक जुडे हुए है। अंतरजाल से जुडे हुए संगणक आपस मे अंतरजाल नियमावली (en:Internet Protocol) के जरिए सूचना का आदान-प्रदान करते है। अंतरजाल के जरिए मिलने वाली सूचना और सेवाओ मे अंतरजाल पृष्ठ, ईमेल और बातचीत सेवा प्रमुख है। इनके साथ-साथ चलचित्र, संगीत, विडियो के इलेक्ट्रनिक स्वरुप का आदान-प्रदान भी अंतरजाल के जरिए होता है।
इतिहाससर्वप्रथम १९६२ में विश्वविद्यालय के जे सी आर लिकलिडर ने अभिकलित्र जाल तैयार किया था। वे चाहते थे कि अभिकलित्र का एक एसा जाल हो ,जिससे आंकड़ो, क्रमादेश और सूचनायें भेजी जा सके। 1966 में डारपा (मोर्चाबंदी प्रगति अनुसंधान परियोजना अभिकरण) (en:DARPA) ने आरपानेट के रूप में अभिकलित्र जाल बनाया|यह जाल चार स्थानो से जुडा था। बाद में इसमें भी कई परिवर्तन हुए और
अमरीकी सेना की सूचना और अनुसंधान संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 1973 में ``यू एस एडवांस रिसर्च प्र्रोजेक्ट एजेंसी´´ ने एक कार्यक्रम की शुरुआत की। उस कार्यक्रम का उद्देश्य था कम्प्यूटरों के द्वारा विभिन्न प्रकार की तकनीकी और प्रौद्योगिकी को एक-दूसरे से जोड़ा जाए और एक `नेटवर्क´ बनाया जाए। इसका उद्देश्य संचार संबंधी मूल बातों ( कम्यूनिकेशन प्रोटोकॉल ) को एक साथ एक ही समय में अनेक कम्प्यूटरों पर नेटवर्क के माध्यम से देखा और पढ़ा जा सके। इसे ``इन्टरनेटिंग प्रोजेक्ट´´ नाम दिया गया जो आगे चलकर `इंटरनेट´ के नाम से जाना जाने लगा। 1986 में अमरीका की ``नेशनल सांइस फांउडेशन´´ ने ``एनएसएफनेट´´ का विकास किया जो आज इंटरनेट पर संचार सेवाओं की रीढ़ है। एक सैकण्ड में 45 मेगाबाइट संचार सुविधा वाली इस प्रौद्योगिकी के कारण `एनएसएफनेट´ बारह अरब -12 बिलियन- सूचना पैकेट्स को एक महीने में अपने नेटवर्क पर आदान-प्रदान करने में सक्षम हो गया। इस प्रौद्योगिकी को और अधिक तेज गति देने के लिए `नासा´ और उर्जा विभाग ने अनुसंधान किया और ``एनएसआईनेट´´ और `ईएसनेट´ जैसी सुविधाओं को इसका आधार बनाया।
इंटरनेट का तकनीकी विकासपिछले 1८ सालों से इंटरनेट सहकारी पक्षों के बीच सहयोगी भूमिका निभाता चला आ रहा है। इंटरनेट के संचालन में कुछ बातें बहुत जरूरी हैं। इनमे से एक है प्रणाली को संचालित करने वाले प्रोटोकोल का निर्धारण। प्रोटोकोल का मूल विकास डीएआरपीए अनुंसधान कार्यक्रम में किया गया किन्तु पिछले 5-6 सालों में यह कार्य विभिन्न देशों की सरकारी एजेंसियों, उद्योगों व शैक्षिक समुदाय की सहायता से विस्तृत रूप से किया जाने लगा है। इंटरनेट समुदाय के सही मार्गदर्शन और टीसीपी/आईपी के समुचित विकास के लिये 1983 में अमरीका में इंटरनेट एक्टिविटीज बोर्ड का गठन किया गया।
भारत मे अंतरजालभारत में अंतरजाल 80 के दशक मे आया,जब एर्नेट(educational & research network) को सरकार ,इलेक्ट्रानिक्स विभाग और संयुक्त राष्ट्र उन्नति कार्यक्रम(UNDP)की ओर से प्रोत्साहन मिला|सामान्य उपयोग के लिये जाल [15 अगस्त]]1995 से उपलब्ध हुआ, जब विदेश सचांर निगम सीमित (VSNL) ने गेटवे सर्विस शुरू की| अंतरजाल शब्दावली
यह एक ऎसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी भी प्रकार की फ़ाइल मेल संदेश के साथ जोडकर इंटरनेट के माध्यम से किसी को भी भेजी या प्राप्त की जा सकती है*
इसका अर्थ "अमेरिकन स्टैण्डर्ड फ़ोर इंफ़र्मेशन इंटरचेंज"है|यह नोटपेड मे सुरक्षित किये जाने वाले टेक्स्ट का बॉयडिफ़ाल्ट फ़ार्मेट है यदि आप नोटपेड मे किसी टेक्स्ट को प्राप्त कर रहे है तो वह फ़ार्मेट ASCII है|
यह सुविधा ब्राउसर के एड्रेस बार मे होती है।इसके शुरू मे कुछ डाटा टाइप करते ही URL पूर्ण हो जाता है।इसके लिये जरूरी है कि वह URL पहले प्रयोग किया गया हो।
इस प्रोग्राम मे कम्प्यूटर की मेमोरी या फ़ाइल मे छूपे हुए वाइरस को ढूंढ निकालने या सम्भव हो तो , नष्ट करने की क्षमता होती है| इसके द्वारा इंटरनेट की स्पीड नापी जाती है| बैंडविड्थ जितनी अधिक होगी,इंटरनेट की स्पीड उतनी ही ज्यादा होगी|
वर्ल्ड वाइड वेब पर सूचना प्राप्त करने मे मददगार सॉफ्टवेयर को ब्राउसर कहते है|नेटस्केप नेवीगेटर और इंटरनेट एक्सप्लोरर सर्वाधिक प्रचलित ब्राउसर है|यह एक ऎसा सॉफ्टवेयर होता है जो HTML और उससे संबंधित प्रोग्राम को पढ सकता है|
ब्राउसर मे स्थित विशेष लिंक, जो किसी विशेष सेक्शन मे लिंक बनाने में मदद करता है| इंटरनेट एक्सप्लोरर मे यह फ़ेवरेट कहलाता है|
सर्फ़िंग के दॊरान वेब पेज और उससे संबंधिंत चित्र एक अस्थायी भन्डार मे ट्रांसफ़र हो जाते है|येह तब तक नही हटते है ,जब तक इन्हे हटाया न जाये या ये रिपलेस न हो जाये|एक ही वेबसाइट पर जाना उतना ही आसान होता है, क्योंकि समान कंटेंट डाउनलोड की आवश्यकता नही होती|यदि आप अलग -अलग साइटस पर विजिट कर रहे हो तो ये फ़ाइल आपकी स्पीड कम कर देती है|
यह वेब सर्वर द्वारा भेजा गया डेटा होता है,जिसे ब्राउसर द्वारा सर्फर के कम्प्यूटर मे एक फाइल मे स्टोर कर लिया जाता है|
मोडेम से प्राप्त ऎनालॉग डेटा को डिजिटल डेटा मे बदलने की प्रक्रिया डिमोड्यूलेशन कहलाती है|
किसी फाइल को वर्ल्ड वाइड वेब से कॉपी करने की प्रक्रिया डॉउनलोड कहलाती है|
किसी भी कम्पनी को अपनी विशिष्ट पहचान कायम रखने के लिये अपनी कम्पनी का नाम पंजीकरण करवाना होता है|यह प्रक्रिया इंटरनेट सर्विस प्रोवाडर की देख-रेख मे चलती है|
इंटरनेट पर व्यापारिक लेखा-जोखा रख्नने की प्रक्रिया और नेट पर ही ख्ररीदी -बिक्री की प्रक्रिया ई-कॉमर्स कहलाती है|
वेब ब्राउसर से किसी साइट को ओपन करते ही जो पृष्ट सामने खुलता है वह उसका होम पेज कहलाता है|
वेबसाइट पर किसी खास विषय से जुडे प्रश्न |वेब साइट पर faq के माध्यम से प्रश्न भी भेजे जा सकते है|
एक कम्प्यूटर से मोडेम द्वारा इंटरनेट से जुडे किसी अन्य कम्प्यूटर से स्टेण्डर्ड फोन लाइन पर कनेक्शन को डायल अप कनेक्शन कहते है|
किसी पर्सनल कम्प्यूटर को किसी अन्य पर्सनल कम्प्यूटर पर ,LAN और इंटरनेट से जोडने वाले प्रोग्राम को डायल अप नेटवर्किंग कहते है|
किसी कम्प्यूटर या LAN और इंटरनेट के बीच स्थायी सम्पर्क को डायरेक्ट कनेक्शन कहा जाता है| यदि फोन कनेक्शन कम्पनी से टेलीफोन कनेक्शन लीज पर लिया जाता है,तो उसे लीज्ड लाइन कनेक्शन कहते है|
वर्ल्ड वाइड वेब पर डाक्यूमेंट के लिये प्रयोग होने वाली मानक मार्कअप भाषा|HTML भाषा टैग का उपयोग करता है|
वर्ल्ड वाइड वेब पर सर्वर से किसी यूजर तक दस्तावेजो को ट्रांसफर करने वाला कम्यूनिकेशन प्रोटोकाल HTTP कहलाता है| आधुनिक रूपइंटरनेट २.०यह भी देखेंबाहरी कड़ियाँ
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